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सरकार रिपीट करवाने के लिए सुक्खू कांगड़ा मजबूत कर रहे हैं वोट प्राप्त करने में कांग्रेस बहुत पीछे नहीं रही... विशेष संवाददाता
हिमाचल के 51 शहरी निकायों के रुझानों के मुताबिक भाजपा का परचम लहरा रहा है। इनमें अधिकतर शिमला और मंडी संसदीय क्षेत्र की हैं। यही वजह है कि कांग्रेस थोड़ी पिछड़ती हुई दिखाई दे रही है। चार नगर निगमों धार्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन के चुनाव परिणाम भी आ चुके हैं। इनमें कांग्रेस के वोट प्रतिशत में कोई खास कमी नहीं आई है। यही आभास होने लगा है कि माइक्रो लेवल की राजनीति किस ओर पलट रही है। शिमला संसदीय क्षेत्र के सोलन नगर निगम के लिए सबसे कम मतदान 64.20 फीसदी हुआ। जबकि हमीरपुर में सबसे अधिक 89 फीसदी मतदान हुआ। प्रदेश भर में कुल 69.16 फीसदी मतदान हुआ। कांग्रेस और भाजपा के बीच वोटों का अंतर भी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। जिला स्तर पर देखें तो हमीरपुर में सबसे ज्यादा 78.89 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद शिमला में 77.36 फीसदी और ऊना में 77 फीसदी मतदान हुआ। वहीं, सबसे कम मतदान सोलन जिले में 64.20 फीसदी रहा। वोट डालने में भी कांग्रेसियों में बराबर का उत्साह बना रहा। सभी चुनाव परिणाम बाहर आने के बाद यह तस्वीर स्पष्ट होती जा रही है कि विधानसभा चुनावों के लिए राजनैतिक बिसात किस प्रकार बिछाई जाएगी। सोलन, धर्मशाला और मंडी नगर निगम में भाजपा का मेयर होगा वहीं पालमपुर में कांग्रेस अपना मेयर बनाएगी। इस वजह भी साफ दिखाई देती है कि सुक्खू इसी मार्ग पर चलकर प्रदेश में पहली बार मिशन रिपीट को अंजाम तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। भाजपा के लिए सबसे बड़ा खतरा मंडी को लेकर है जहां जयराम ठाकुर फिलहाल अपनी पीठ ठोक रहे हैं। वहां पंचायतों के चुनाव परिणाम वैसे नहीं आए हैं कि कहा जा सके, मंडी में जयराम का एकछत्र साम्राज्य है। कहते हैं कि इस बार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मंडी में पुराने मित्रों सुखविंदर सिंह सुक्खू और अनिल शर्मा का भरत मिलाप हो ही जाएगा। ऐसे में भाजपा सिर्फ शिमला संसदीय क्षेत्र में उछल-कूद करती हुई रह जाएगी। पंचायती और स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम मौजूदा सरकार के लिए एक लिटमस टेस्ट हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन चुनावों के बाद भाजपा और कांग्रेस विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। अब यह चरचा भी तेज हो गई है कि हिमाचल प्रदेश में अगली सरकार कौन बनाएगा। हलांकि इसके लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपनी तैयारी भी शुरू कर ली है। पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव दोनों पार्टियों को फीड बैक देने का कार्य करेंगे कि किस पार्टी को सरकार में आने के लिए क्या करना होगा। भाजपा में साफ संकेत दिख रहे हैं कि भाजपा में नेनृत्व परिवर्तन करना होगा, वहीं कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना होगा। श्री विनय कुमार कुछ समय पहले ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं। इससे पहले श्रीमती प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष थीं और उनके समय में प्रदेश कांग्रेस का कोई संगठन नहीं बना था। इस बात का खमियाजा भी कांग्रेस ने पंचायती राज चुनावों में उठाया है। |
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